Tuesday, September 2, 2008

सफ़र, सफ़र है....!

भाग्य बाँचने से यदि मिलता

सबके भाग्य यहाँ खुल जाते

साध्य सोचने से यदि मिलता

सब सुख के मालिक बन जाते

सफ़र, सफ़र है ठहर न जाना

चलना, चाल-चलन जीवन है

प्राप्य रुदन से यदि मिलता तो

रोने वाले सिद्ध कहाते !

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7 comments:

Luca said...

:-))

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह...
जीवन से जुड़े भाव...
यथार्थपरक..
बधाई..
is rachnatmak abhivyakti ke liye

श्रीकांत पाराशर said...

Prapya rudan se yadi milta to rone wale sidhh kahate. Dr. saheb bahut achhi linen hain ye. poori rachana saar garbhit hai.

नीरज गोस्वामी said...

जैन साहेब...कितने सरल शब्दों में आप कैसे इतनी गहरी बात कर जाते हैं...हैरानी होती है...वाह.
नीरज

Unknown said...

आज सारी रचनायें पढ़ी
बहुत खूब लिखा है
बधाई ।

राज भाटिय़ा said...

चन्द्र कुमार जी, आप ने कविता के रुप मे बहुत ही गहरी बात कह दी धन्यवाद

Dr. Chandra Kumar Jain said...

आभार आप सब का.
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शुभकामनाएँ
डॉ.चन्द्रकुमार जैन